#गुमलासमाचार #टोलविवाद : स्थानीय लोगों से टोल वसूली के विरोध में चैंबर्स ऑफ कॉमर्स का प्रदर्शन।
गुमला जिले के आंजन धाम टोल प्लाजा पर स्थानीय लोगों से टोल टैक्स वसूली के विरोध में चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 20 किलोमीटर दायरे के स्थानीय वाहनों को टोल छूट देने की मांग उठाई। विरोध के दौरान कुछ समय के लिए सड़क जाम हो गई, जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर आवागमन बहाल कराया। मामले में एनएचएआई की गाइडलाइन और स्थानीय सुविधा को लेकर बातचीत जारी है।
- आंजन धाम टोल प्लाजा पर चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने किया विरोध प्रदर्शन।
- स्थानीय लोगों से टोल वसूली का किया गया विरोध।
- प्रदर्शनकारियों ने कुछ घंटों तक सड़क जाम कर बाधित किया आवागमन।
- प्रशासन और पुलिस ने पहुंचकर यातायात कराया बहाल।
- चैंबर ने मासिक पास की जगह वार्षिक पास की मांग उठाई।
- एनएचएआई गाइडलाइन के तहत टोल वसूली की बात कही गई।
गुमला जिले के आंजन धाम टोल प्लाजा पर स्थानीय लोगों से टोल टैक्स वसूली को लेकर शुक्रवार को चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों को टोल शुल्क में छूट देने की मांग को लेकर टोल प्लाजा परिसर में जमकर नारेबाजी हुई।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि टोल प्लाजा के आसपास 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय नागरिकों से टोल टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए। उनका आरोप था कि पहचान पत्र दिखाने के बावजूद कई लोगों का टोल शुल्क ऑटोमेटिक सिस्टम से कट जा रहा है।
कुछ घंटों तक जाम रही सड़क
विरोध प्रदर्शन के दौरान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने टोल गेट के दोनों ओर सड़क जाम कर दी। इससे कुछ समय के लिए आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।
टोल प्लाजा के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी लगातार स्थानीय लोगों को टोल में छूट देने की मांग करते रहे।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
स्थिति की जानकारी मिलने के बाद सिसई अंचलाधिकारी अशोक बड़ाईक, थाना प्रभारी नीरज कुमार और अन्य पुलिस पदाधिकारी सशस्त्र बलों के साथ मौके पर पहुंचे।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और सड़क खाली कराते हुए आवागमन फिर से शुरू कराया। हालांकि इसके बाद भी टोल प्लाजा परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
स्थानीय लोगों के लिए छूट की मांग
चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के सदस्यों का कहना था कि स्थानीय लोगों को बार-बार टोल शुल्क देना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई लोग रोजाना रोजगार, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं, इसलिए स्थानीय वाहनों को विशेष छूट मिलनी चाहिए।
टोल मैनेजर ने दी सफाई
टोल मैनेजर सतीश चंद्र फिलहाल अवकाश पर थे। दूरभाष पर बातचीत में उन्होंने कहा:
“एनएचएआई की गाइडलाइन के अनुसार ही टोल टैक्स लिया जा रहा है। स्थानीय लोग 340 रुपये का पास लेकर पूरे महीने टोल पार कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि अन्य वाहनों से भी निर्धारित दरों के अनुसार ही शुल्क लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश लोग गुमला से रांची तक लगभग 60 किलोमीटर टोल रोड का उपयोग करते हैं और इसी सुविधा के बदले टोल शुल्क लिया जाता है।
वार्षिक पास की उठी मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के कुछ सदस्य मासिक पास व्यवस्था के लिए सहमत दिखाई दिए, लेकिन उन्होंने मांग की कि पास मासिक के बजाय वार्षिक होना चाहिए ताकि लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।
लोगों का कहना था कि बार-बार पास बनवाने की प्रक्रिया भी परेशानी का कारण बनती है।
दो दिन में समाधान का आश्वासन
काफी देर तक बातचीत, विरोध और गहमागहमी के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसी के बीच सहमति बनी कि मामले पर दो दिनों के भीतर विचार कर निर्णय लिया जाएगा।
इस दौरान स्थानीय लोगों और चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समाधान नहीं निकला तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
कई व्यापारी और स्थानीय लोग रहे मौजूद
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रमुख रूप से:
राजेश लोहानी (अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कॉमर्स), रमेश कुमार चीनी (उपाध्यक्ष, नगर निगम गुमला), राजेश सिंह (पूर्व अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कॉमर्स गुमला) सहित कई लोग मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो: स्थानीय सुविधा और नियमों के बीच संतुलन की जरूरत
आंजन धाम टोल प्लाजा का यह विवाद यह दर्शाता है कि विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की सुविधाओं का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। यदि स्थानीय नागरिकों को बार-बार आर्थिक बोझ उठाना पड़े तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
वहीं दूसरी ओर एनएचएआई के नियम और सड़क रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना होगा जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिले और व्यवस्था भी प्रभावित न हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जनहित के मुद्दों पर संवाद और समाधान दोनों जरूरी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान निकालना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जब लोग अपनी परेशानियों को लेकर संगठित होकर आवाज उठाते हैं, तो प्रशासन और व्यवस्था दोनों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
जरूरी है कि विकास योजनाओं के साथ आम लोगों की सुविधा और जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए ताकि विश्वास और सहयोग दोनों मजबूत हो सकें।
सजग रहें, जनहित के मुद्दों पर अपनी राय रखें और सकारात्मक समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। अपनी प्रतिक्रिया साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जागरूक समाज निर्माण में सहयोग करें।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).