#गढ़वा #मजदूर_दिवस : कॉफी संवाद में श्रमिकों की समस्याएं सुनी—मौके पर समाधान और सम्मान मिला।
गढ़वा में मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर एसडीएम संजय कुमार ने ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम आयोजित कर श्रमिकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान 50 से अधिक मजदूरों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं रखीं। मौके पर लेबर कार्ड वितरण और नए पंजीकरण भी किए गए। यह पहल श्रमिकों के सम्मान और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- एसडीएम संजय कुमार के नेतृत्व में ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम आयोजित।
- 50 से अधिक श्रमिक, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल।
- मौके पर 15 लेबर कार्ड वितरित, 10 श्रमिकों का पंजीकरण।
- श्रमिकों को सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
- आवास, पेंशन, शिक्षा व पानी जैसी समस्याएं उठीं।
- श्रमिकों को गमछा और स्टॉल देकर सम्मानित किया गया।
गढ़वा में मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम ने प्रशासन और आम श्रमिकों के बीच संवाद का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया। अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में दिहाड़ी मजदूरों को सीधे अपनी समस्याएं रखने और समाधान पाने का अवसर मिला। कार्यक्रम में महिला श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और खास बना दिया।
श्रमिकों को योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान एसडीएम संजय कुमार ने झारखंड सरकार की विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने श्रमिकों से अपील की कि वे दूसरे राज्यों में काम करने जाने से पहले श्रमाधान पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “श्रमिकों को अपने अधिकारों और योजनाओं की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि वे हर परिस्थिति में सुरक्षित रह सकें।”
उन्होंने बताया कि पंजीकरण के बाद श्रमिकों को दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, अंगभंग जैसी स्थितियों में आर्थिक सहायता मिलती है। साथ ही सेफ्टी किट, औजार सहायता, छात्रवृत्ति, चिकित्सा सहायता, मातृत्व सुविधा, विवाह सहायता और पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ भी मिलता है।
मौके पर लेबर कार्ड और पंजीकरण
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि 15 श्रमिकों को मौके पर ही लेबर कार्ड प्रदान किया गया। इसके अलावा 10 नए श्रमिकों का पंजीकरण भी तुरंत कराया गया।
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी डब्लू कुमार ने भी श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी देते हुए जागरूक किया। इससे श्रमिकों को तत्काल लाभ मिलने से उनमें खुशी देखी गई।
श्रमिकों ने खुलकर रखीं समस्याएं
संवाद के दौरान श्रमिकों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याएं खुलकर एसडीएम के सामने रखीं।
महुलिया की प्रमिला देवी ने बताया कि उन्होंने कई बार आवास योजना के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक लाभ नहीं मिला।
ओबरा की नीता देवी और बघमनवा की सीमा देवी ने भी आवास से जुड़ी समस्याएं साझा कीं।
छतरपुर पंचायत के रविकांत भारती ने बताया कि दुर्घटना में पैर खराब होने के बाद वे काम करने में असमर्थ हैं। इस पर उन्हें ₹10,000 की सहायता और ₹1,000 मासिक पेंशन योजना की जानकारी दी गई।
बघौता की अनीता देवी ने अपनी बच्चियों के स्कूल नामांकन में मदद मांगी, जबकि किरण कुमारी ने रामकंडा आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए सहयोग की मांग की।
बघमनवा की सुखनी देवी ने पानी की समस्या उठाते हुए बताया कि उनका चापाकल खराब है। इस पर संबंधित विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बिचौलियों से सावधान रहने की अपील
कुछ श्रमिकों ने शिकायत की कि श्रम विभाग में बिचौलिये सक्रिय हैं और डीबीटी राशि में कमीशन लेते हैं। इस पर एसडीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए श्रमिकों को सीधे शिकायत करने को कहा।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “किसी भी बिचौलिये के चक्कर में न पड़ें, यदि कोई पैसा मांगता है तो सीधे मुझे सूचित करें।”
उन्होंने श्रमिकों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया और जागरूक रहने की अपील की।
श्रमिकों का सम्मान
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रमिकों को सम्मानित किया गया। पुरुष श्रमिकों को गमछा और महिला श्रमिकों को स्टॉल प्रदान किया गया। साथ ही उनके बच्चों को चप्पल और जूते भी दिए गए।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “मजदूरों का सम्मान करना कोई एहसान नहीं, बल्कि समाज का कर्तव्य है।”
उन्होंने कहा कि विकास की हर योजना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका श्रमिकों की होती है और वे सच्चे सम्मान के हकदार हैं।
प्रशासन और जनता के बीच मजबूत संवाद
यह कार्यक्रम प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा। श्रमिकों को न केवल अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिला, बल्कि तत्काल समाधान भी देखने को मिला।

न्यूज़ देखो: संवाद से समाधान की दिशा में मजबूत कदम
गढ़वा में ‘कॉफी विद एसडीएम’ जैसी पहल यह दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो समस्याओं का समाधान जमीन स्तर पर ही संभव है। श्रमिकों को सम्मान और अधिकार देना केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि ऐसे संवाद से ही संभव है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक श्रमिक ही सशक्त समाज की पहचान
मजदूर सिर्फ श्रम नहीं देते, वे देश के विकास की नींव होते हैं।
उनकी समस्याओं को समझना और समाधान देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
ऐसी पहलें तभी सफल होंगी, जब समाज भी जागरूक और संवेदनशील बनेगा।
अपने अधिकारों को जानें, जागरूक रहें और किसी भी गलत प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं।
आपकी एक छोटी जागरूकता कई लोगों की जिंदगी बदल सकती है।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को साझा करें और श्रमिक सम्मान के इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

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