#झारखंडकृषिविकास #कृषिसलाहकारबैठक : गढ़वा में कृषि योजनाओं और वैज्ञानिक कार्यों पर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा में 20वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रगति रिपोर्ट और 2026-27 की कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. पी.के. सिंह ने की। इसमें वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। किसानों के हित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
- कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा में 20वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
- बैठक की अध्यक्षता डॉ. पी.के. सिंह ने की और वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की गई।
- श्री महेश चंद्र जेराई द्वारा 2025-26 की प्रगति रिपोर्ट और 2026-27 की कार्य योजना प्रस्तुत की गई।
- मृदा परीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रसार गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
- किसानों के लाभ और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रसार गतिविधियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से गढ़वा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में यह बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ आगामी वर्ष 2026-27 की कार्य योजना पर गंभीर चर्चा हुई। इसमें वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और विभिन्न कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों तक तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाना रहा।
बैठक का आयोजन और अध्यक्षीय संबोधन
बैठक की अध्यक्षता डॉ. पी.के. सिंह, निदेशक अनुसंधान एवं कीट विभाग, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची ने की। उन्होंने केंद्र द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि कृषि विकास में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. पी.के. सिंह ने कहा: “किसानों तक योजनाओं और तकनीकी जानकारी का प्रभावी हस्तांतरण ही कृषि विकास की असली कुंजी है।”
उन्होंने यह भी बल दिया कि लाइन डिपार्टमेंट के सहयोग से योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना आवश्यक है ताकि अधिकतम किसान लाभान्वित हो सकें।
प्रगति रिपोर्ट और आगामी कार्य योजना
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रधान श्री महेश चंद्र जेराई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में खेत पर परीक्षण, प्रथम पंक्ति प्रत्यक्षण-प्रशिक्षण, मृदा नमूनों की जांच और प्रसार गतिविधियों का विस्तृत विवरण शामिल था।
इसके अलावा टीडीसी निकरा परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों और उनके परिणामों की भी प्रस्तुति दी गई।
साथ ही वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित कार्य योजना भी प्रस्तुत की गई जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार और मृदा स्वास्थ्य सुधार पर विशेष फोकस रखा गया।
विशेषज्ञों के सुझाव और तकनीकी चर्चा
बैठक में विभिन्न विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के डीन डॉ. अशोक कुमार और रजिस्ट्रार डॉ. दीपक कुमार शुक्ला, तथा गढ़वा कृषि महाविद्यालय के डॉ. अरविंद कुमार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर प्रकाश डाला और किसानों को इसकी जानकारी देने की आवश्यकता बताई।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची से डॉ. निरंजन लाल, डि०यन० सिंह, तथा क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान, चियांकी पलामू से डॉ. अखिलेश शाह ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
डॉ. अखिलेश शाह ने कहा: “तकनीकी जानकारी को खेत स्तर तक पहुंचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
प्रशासनिक अधिकारियों और संस्थानों की भागीदारी
बैठक में जिले और राज्य स्तर के कई अधिकारी एवं संस्थान शामिल रहे। इनमें प्रमुख रूप से:
डॉ. राजीव कुमार (कृषि विज्ञान केंद्र पलामू), श्रीमती खुशबू पासवान (जिला कृषि पदाधिकारी), श्री धनराज आर०के०६ आप्से (जिला मत्स्य पदाधिकारी), श्री चंद्र किशोर कुमार (जिला भूमि संरक्षण अधिकारी), डॉ. विध्या सागर सिंह (जिला पशुपालन पदाधिकारी), गिरीश कुमार (जिला गव्य विकास पदाधिकारी), जिला एलडीएम गढ़वा, और डी.डी.एम. नाबार्ड डि०टी० लुगुन उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त केंद्र के डॉ. बंधनु ओरॉन, श्री नवलेश कुमार, श्री विंध्याचल राम, सियाराम पांडेय, सुनील कुमार, अमित बैठा, राकेश रंजन चौबे, अनिल कुमार, कृष्ण कुमार चौबे, श्री नवलेश कुमार, नेहा कुमारी (जेएसपीएस), 10के एफ.पी.ओ. प्रतिनिधि, जागृति महिला मंडल की श्रीमती सुमन आँखोर, ग्रासिम इंडस्ट्रीज रेहला के अनिल गिरी, प्रदान से प्रभात रंजन, जनसेवक श्री चंदन कुमार, श्री राकेश रौशन, श्री ब्रज भूषण पाण्डेय, अशोक राम, ब्रजेश तिवारी, शिवनाथ कुशवाहा, सोनिया कुमारी, शिला देवी, अयोध्या बिन्द, ब्रजकिशोर महतो सहित अनेक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
किसानों की भागीदारी और सुझाव
बैठक में किसानों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता, मृदा जांच सुविधाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार की मांग रखी। वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

न्यूज़ देखो: कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच मजबूत सेतु की जरूरत
यह बैठक स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कृषि विकास केवल योजनाओं से नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से संभव है। वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों के बीच संवाद को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। गढ़वा में आयोजित यह बैठक कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
कृषि विकास में सहभागिता ही असली शक्ति
कृषि केवल उत्पादन नहीं बल्कि समाज की जीवनरेखा है। जब वैज्ञानिक, प्रशासन और किसान एक साथ आते हैं, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे आयोजनों से न केवल जानकारी बढ़ती है बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा भी मजबूत होती है।
आइए, हम सभी मिलकर कृषि परिवर्तन की इस यात्रा को आगे बढ़ाएं। किसानों की आवाज़ को मजबूत करें, नई तकनीकों को अपनाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं।
सजग रहें, सक्रिय बनें, और अपने क्षेत्र के विकास में भागीदार बनें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और कृषि जागरूकता को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

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