वट सावित्री पर्व पर सिमडेगा में श्रद्धा का सैलाब, सुहागिनों ने की विधिवत पूजा अर्चना

वट सावित्री पर्व पर सिमडेगा में श्रद्धा का सैलाब, सुहागिनों ने की विधिवत पूजा अर्चना

author Birendra Tiwari
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#वटसावित्रीपर्व #सिमडेगा : सिमडेगा जिले में सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा और परंपरा के साथ वट सावित्री व्रत मनाया।

सिमडेगा जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री पूजा श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई गई। सुबह से ही वट वृक्षों के पास सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां उन्होंने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे जिले में धार्मिक माहौल और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

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  • सिमडेगा जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वट सावित्री पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न।
  • सुबह से ही वट वृक्षों के पास सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी।
  • महिलाओं ने पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना की।
  • पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर जल, अक्षत, फल-फूल और पूजा सामग्री से वट वृक्ष की पूजा की गई।
  • सूत बांधकर सात बार परिक्रमा और सामूहिक रूप से कथा श्रवण का आयोजन हुआ।
  • बाजारों में भी पूजा को लेकर पूजन सामग्री और फलों की खरीदारी में तेजी देखी गई।

सिमडेगा जिले में वट सावित्री पूजा के अवसर पर शनिवार को पूरे क्षेत्र में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक सुहागिन महिलाओं ने सुबह से ही वट वृक्ष के पास पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया।

पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर वट वृक्ष की पूजा की और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने जल, रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित कर वट वृक्ष को श्रद्धा के साथ नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने सूत का धागा बांधकर वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा भी की, जो इस व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय रहा। महिलाओं ने सामूहिक रूप से सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा भी सुनी, जिससे व्रत के धार्मिक महत्व और परंपरा की गहराई को समझने का अवसर मिला। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु महिलाओं की भावनात्मक भागीदारी स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

व्रत का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

वट सावित्री व्रत को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है।

वट वृक्ष को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का प्रतीक भी कहा जाता है। इसी कारण इस वृक्ष की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व होता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं और पूजा के माध्यम से अपने पारिवारिक जीवन की सुख-शांति की कामना करती हैं।

बाजारों में दिखी रौनक और उत्साह

वट सावित्री पूजा को लेकर सिमडेगा जिले के बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही फल, फूल, प्रसाद, श्रृंगार सामग्री और पूजा से संबंधित वस्तुओं की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। व्यापारियों के अनुसार, पूजा के कारण बाजार में अच्छी बिक्री दर्ज की गई, जिससे स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिला।

पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने अपने घर लौटकर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और सुहाग सामग्री का वितरण किया। पूरे दिन जिले में धार्मिक और पारंपरिक माहौल बना रहा, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा दृश्य दिखाई दिया।

न्यूज़ देखो: सिमडेगा में वट सावित्री पूजा ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को किया मजबूत

वट सावित्री पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय परंपरा और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूत करता है। सिमडेगा में इस पर्व का भव्य आयोजन यह दर्शाता है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परंपराएं आज भी जीवंत हैं। हालांकि, बढ़ती आधुनिकता के बीच ऐसे आयोजनों की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन और समाज दोनों के लिए यह जरूरी है कि ऐसे आयोजनों में सुविधा और व्यवस्था बनी रहे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था की इस परंपरा को बनाए रखें, समाज में संस्कारों को दें मजबूती

वट सावित्री व्रत जैसे पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की गहरी जड़ों का प्रतीक हैं। यह पर्व हमें परिवार, समर्पण और विश्वास के मूल्यों से जोड़ता है। ऐसे अवसर हमें अपनी परंपराओं पर गर्व करने का अवसर देते हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी इनसे जोड़ते हैं।

समाज के हर वर्ग को चाहिए कि वह ऐसे पर्वों को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में आगे बढ़ाए। आपसी सहयोग और एकता से ही ऐसे आयोजनों की सुंदरता और बढ़ती है।

सजग रहें, परंपराओं से जुड़े रहें। इस वट सावित्री पर्व की भावना को आगे बढ़ाएं और अपने आसपास के लोगों को भी सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ें। अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और समाज में सकारात्मकता फैलाने में योगदान दें।

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Written by

सिमडेगा

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