20 हजार रुपये की चोरी के शक में युवक को दी गई खौफनाक सजा, खौलते गोबर के पानी में डाले हाथ

20 हजार रुपये की चोरी के शक में युवक को दी गई खौफनाक सजा, खौलते गोबर के पानी में डाले हाथ

author News देखो Team
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#रांची #अंधविश्वास : चोरी के आरोप में युवक को अमानवीय यातना देकर गंभीर रूप से घायल किया गया।

रांची जिले के नरकोपी थाना क्षेत्र के सरवा गांव में अंधविश्वास की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। 20 हजार रुपये चोरी करने के आरोप में एक 18 वर्षीय युवक को कथित रूप से खौलते गोबर मिश्रित पानी में हाथ डालने के लिए मजबूर किया गया। घटना में युवक गंभीर रूप से झुलस गया और उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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  • नरकोपी थाना क्षेत्र के सरवा गांव में युवक पर 20 हजार रुपये चोरी का आरोप लगाया गया।
  • सच्चाई की परीक्षा के नाम पर युवक के हाथ खौलते गोबर मिश्रित पानी में डलवाए गए।
  • 18 वर्षीय अनूप उरांव के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गए, कुछ उंगलियों को भी नुकसान पहुंचा।
  • पीड़ित की मां सुमी उरांव ने नरकोपी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
  • पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
  • घटना के बाद आरोपी गांव छोड़कर फरार हो गए हैं।

रांची जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अंधविश्वास का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी से करीब 60 किलोमीटर दूर नरकोपी थाना क्षेत्र के सरवा गांव में एक युवक को चोरी के आरोप में ऐसी सजा दी गई, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। घटना के बाद युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

चोरी के आरोप से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार सरवा गांव निवासी 18 वर्षीय अनूप उरांव पर उसके एक पड़ोसी ने 20 हजार रुपये चोरी करने का आरोप लगाया। अनूप ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई चोरी नहीं की है।

इसके बावजूद आरोप लगाने वाले पक्ष ने मामले को कानूनी प्रक्रिया या पंचायत के माध्यम से सुलझाने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। ग्रामीण क्षेत्र में प्रचलित एक कथित परंपरा के तहत युवक की सच्चाई की परीक्षा लेने का निर्णय लिया गया।

खौलते गोबर के पानी में डाले गए दोनों हाथ

ग्रामीणों के अनुसार गांव में चोरी की पहचान करने के नाम पर पानी और गोबर को मिलाकर उसे अत्यधिक तापमान तक गर्म किया जाता है। फिर आरोपी व्यक्ति को उसमें हाथ डालने के लिए कहा जाता है।

इसी तथाकथित परीक्षा के तहत अनूप उरांव के दोनों हाथ खौलते गोबर मिश्रित पानी में डलवा दिए गए। इस दौरान युवक दर्द से चीखता रहा, लेकिन उसकी गुहार को नजरअंदाज कर दिया गया।

कुछ ही मिनटों में उसके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। गंभीर जलन के कारण हाथों की त्वचा क्षतिग्रस्त हो गई और बाद में उसकी कुछ उंगलियों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।

हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती

घटना के बाद परिजन युवक को इलाज के लिए रांची स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है।

परिजनों के अनुसार हाथों में गहरे घाव हो गए हैं और लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। घटना ने पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक संकट में डाल दिया है।

मां ने दर्ज कराई प्राथमिकी

घटना के बाद कुछ जागरूक ग्रामीणों ने परिवार को कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी। इसके बाद पीड़ित युवक की मां सुमी उरांव ने नरकोपी थाना में शिकायत दर्ज कराई।

सुमी उरांव ने बताया कि उनके बेटे के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया गया और अंधविश्वास के नाम पर उसे गंभीर चोट पहुंचाई गई।

सुमी उरांव ने कहा: “गोबर मिश्रित उबलते पानी में हाथ डलवाने से मेरे बेटे के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गए हैं। उसकी कुछ उंगलियां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।”

पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

पीड़ित परिवार की शिकायत पर नरकोपी थाना में कांड संख्या 14/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 124(1), 217(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

घटना सामने आने के बाद आरोपी गांव से फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस लगातार उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है।

नरकोपी थाना प्रभारी शैलेन्द्र ने कहा: “मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।”

अंधविश्वास आज भी बना चुनौती

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आधुनिक युग में भी ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास किस हद तक प्रभावी है। वैज्ञानिक सोच और कानूनी व्यवस्था के बावजूद लोग कई बार तथाकथित परंपराओं और झूठी मान्यताओं के आधार पर फैसले लेने लगते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता है। किसी भी अपराध या विवाद की जांच का अधिकार केवल कानून और प्रशासन को है, न कि अंधविश्वास आधारित तरीकों को।

पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में

अनूप उरांव का परिवार अब न्याय की मांग कर रहा है। ग्रामीणों का भी कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की अमानवीय हरकत करने का साहस न कर सके।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर अंधविश्वास के खिलाफ लोगों को शिक्षित किया जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।

न्यूज़ देखो: अंधविश्वास की कीमत एक युवक की जिंदगी पर भारी

रांची के सरवा गांव की यह घटना बताती है कि अंधविश्वास आज भी समाज के कुछ हिस्सों में कितनी गहराई से मौजूद है। किसी व्यक्ति को दोषी साबित करने का अधिकार केवल कानून को है, न कि अमानवीय और अवैज्ञानिक तरीकों को। यह मामला प्रशासन, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संगठनों के लिए भी चेतावनी है कि जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित को न्याय कितनी जल्दी मिल पाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही रोक सकता है ऐसी घटनाएं

अंधविश्वास के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार शिक्षा और जागरूकता है।
यदि किसी पर आरोप लगे तो कानून का सहारा लें, न कि हिंसा और अमानवीय प्रथाओं का।
समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं का विरोध करे।
ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और कानूनी जानकारी का प्रसार बेहद जरूरी है।

अपने आसपास अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।

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