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सेविकाओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों में वायरिंग को बताया खानापूर्ति, जबरन दस्तखत का भी आरोप

#चैनपुर #वायरिंग_विवाद : आंगनबाड़ी सेविकाओं ने घटिया वायरिंग और सुरक्षा खतरे पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग उठाई
  • आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली वायरिंग की गुणवत्ता पर सेविकाओं ने उठाए सवाल।
  • खानापूर्ति, सरकारी राशि के बंदरबांट और जबरन दस्तखत कराने का आरोप।
  • प्रति केंद्र एक बल्ब–पंखा कनेक्शन, लेकिन तारों की स्थिति दयनीय
  • सुपरवाइजर अंजली वर्मा ने भी माना कि कार्य संतोषजनक नहीं, बीडीओ को शिकायत भेजी।
  • सोमवार को बिजली कर्मियों को बुलाकर कार्रवाई और सुधार का आश्वासन।

चैनपुर प्रखंड के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही बिजली वायरिंग का काम विवादों में घिरता दिख रहा है। सेविकाओं ने आरोप लगाया है कि कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है और यह केवल कागज़ी खानापूर्ति जैसा लग रहा है। सेविकाओं का कहना है कि खराब वायरिंग केंद्रों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रति केंद्र केवल एक पंखा और एक बल्ब लगाया जा रहा है, लेकिन वायरिंग का स्तर इतना दयनीय है कि इससे स्पष्ट है—सरकारी राशि के बंदरबांट का अंदेशा गहरा है। कई सेविकाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे जबरन सिग्नेचर करवाए जा रहे हैं, जबकि काम की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है।

तारों की स्थिति और सुरक्षा खतरा

सेविकाओं का कहना है कि कई केंद्रों में तार खुले लटक रहे हैं या कमजोर क्वालिटी की वायरिंग की गई है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
एक सेविका ने बताया कि “बस कागज़ों में काम पूरा दिखाने की कोशिश हो रही है, जबकि हकीकत बिल्कुल अलग है। बच्चों का भविष्य और सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है।”

सुपरवाइजर ने भी माना—काम घटिया है

जब बिजली कार्य कर रहे कर्मियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे सुपरवाइजर के निर्देश पर ही काम कर रहे हैं।
लेकिन जब सुपरवाइजर अंजली वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने साफ कहा—

“कार्य तो संतोषजनक नहीं हो रहा है। इसकी शिकायत मैंने बीडीओ यादव बैठा को कर दी है।”
उन्होंने यह भी बताया कि ‘आपके योजना आपके सरकार आपके द्वारा’ कार्यक्रम की व्यस्तता के कारण वे मौके पर जाकर कर्मियों से बात नहीं कर पाई थीं। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार को संबंधित कर्मियों को ऑफिस बुलाकर गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का निर्देश दिया जाएगा।

कार्रवाई कागज़ों में सिमटेगी या सुधरेगी स्थिति?

अब बड़ा सवाल यह है कि जब सुपरवाइजर ने भी खामियों को स्वीकार किया है, तो प्रशासनिक स्तर पर क्या ठोस कार्रवाई होगी?
क्या बीडीओ कार्यालय बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा और वायरिंग को गुणवत्ता के अनुसार सुधारने का निर्देश जारी करेगा?
या फिर यह मामला भी केवल जांच और नोटशीट में दर्ज होकर रह जाएगा—यह देखने वाली बात होगी।

न्यूज़ देखो: बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं

आंगनबाड़ी केंद्रों में वायरिंग जैसी बुनियादी सुविधा यदि खराब हो, तो बच्चों की सुरक्षा सीधे खतरे में पड़ती है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले में त्वरित जांच कर दोषी कर्मियों पर कार्रवाई करे और मानक के अनुरूप काम सुनिश्चित करवाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित आंगनबाड़ी, सुरक्षित भविष्य

स्थानीय लोगों और अभिभावकों से अपील है कि वे केंद्रों की स्थिति पर सतर्क रहें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुँचाएं।
बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है—साझा आवाज ही बदलाव ला सकती है।
लेख को साझा करें और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाएं।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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