#चैनपुर #राजस्वकर्मीविवाद : प्रशासनिक आश्वासन के बाद कर्मचारी संघ ने आंदोलन स्थगित किया।
गुमला जिले के चैनपुर अंचल अंतर्गत केड़ेंग गांव में जमीन सीमांकन के दौरान राजस्व कर्मियों पर हुए हमले के विरोध में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद फिलहाल टाल दिया गया है। कर्मचारी संघ ने उपायुक्त और एसडीओ के आश्वासन पर आंदोलन को 15 से 20 दिनों के लिए स्थगित किया। घटना के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश था और गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
- 29 अप्रैल 2026 को केड़ेंग गांव में सीमांकन के दौरान राजस्व कर्मियों पर हमला हुआ।
- सुजीत कुमार सिन्हा, नरेंद्र सेठ और उमाशंकर कुमार पर दुर्व्यवहार का आरोप।
- प्रशासनिक आश्वासन के बाद कर्मचारी संघ ने हड़ताल 15-20 दिनों के लिए टाली।
- एसडीओ पूर्णिमा कुमारी ने दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
- कर्मचारी संघ ने गिरफ्तारी नहीं होने पर फिर से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
- धरना स्थल पर कई कर्मचारी प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
गुमला जिले के चैनपुर अंचल में राजस्व कर्मियों पर हुए हमले का मामला अब प्रशासन और कर्मचारी संघ के बीच गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। जमीन सीमांकन कार्य के दौरान हुई मारपीट और अपमानजनक व्यवहार के विरोध में कर्मचारी संगठन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी थी। हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप और अधिकारियों के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी कर्मियों की सुरक्षा, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीमांकन कार्य के दौरान हुआ हमला
जानकारी के अनुसार 29 अप्रैल 2026 को चैनपुर अंचल के केड़ेंग गांव में जमीन सीमांकन का कार्य चल रहा था। इस दौरान राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिन्हा, अंचल निरीक्षक नरेंद्र सेठ और कर्मचारी उमाशंकर कुमार मौके पर पहुंचे थे। तभी स्थानीय स्तर पर विवाद उत्पन्न हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 8 से 10 लोगों की भीड़ ने अचानक राजस्व टीम का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान एक महिला ने राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिन्हा को दौड़ा-दौड़ाकर चप्पल से पीटा। इस घटना से सरकारी कर्मियों में भारी नाराजगी फैल गई।
घटना के तुरंत बाद चैनपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कई दिनों तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।
कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा
घटना के विरोध में झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी संघ ने शनिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी थी। कर्मचारियों का कहना था कि यदि सरकारी कार्य करने वाले कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार होगा और आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो भविष्य में अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में काम करने से डरेंगे।
कर्मचारियों ने प्रशासन पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी सेवकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने की वार्ता
स्थिति को गंभीर होता देख उपायुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को प्रशासनिक टीम धरना स्थल पहुंची। इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी पूर्णिमा कुमारी, अंचल अधिकारी दिनेश गुप्ता और बीडीओ यादव बैठा ने आंदोलनकारी कर्मचारियों से बातचीत की।
एसडीओ पूर्णिमा कुमारी ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन पूरी तरह उनके साथ है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
एसडीओ पूर्णिमा कुमारी ने कहा: “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन सरकारी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता की नई धाराओं और प्रक्रियात्मक बदलावों के कारण तकनीकी रूप से तत्काल गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी गिरफ्तारी
राजस्व उप निरीक्षक संघ के जिला सचिव अंकित कुमार होता ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई बातचीत में यह स्पष्ट किया गया है कि मामला अभी नोटिस अवधि में है।
अंकित कुमार होता ने कहा: “जैसे ही कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी, पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी करेगी। प्रशासन ने हमें कार्रवाई का भरोसा दिया है।”
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि वे फिलहाल प्रशासन को समय दे रहे हैं, लेकिन यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
15-20 दिनों के लिए टली हड़ताल
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव भूषण कुमार ने घोषणा करते हुए कहा कि उपायुक्त और एसडीओ के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया जा रहा है।
भूषण कुमार ने कहा: “हम प्रशासन को 15 से 20 दिनों का समय दे रहे हैं। यदि दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो कर्मचारी संघ फिर से सड़क पर उतरने को मजबूर होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद रहे कई कर्मचारी प्रतिनिधि
धरना और वार्ता के दौरान कई कर्मचारी प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से संघ अध्यक्ष जेठू कोरवा, मुरारी प्रसाद सिंह, मनोज प्रसाद, रघुनंदन वैद्य सहित चैनपुर प्रखंड के कई कर्मचारी शामिल थे।
सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
सरकारी कर्मियों की सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
इस घटना के बाद जिले में सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फील्ड में काम करने वाले राजस्व कर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि अक्सर जमीन विवाद और सीमांकन के दौरान उन्हें विरोध और खतरे का सामना करना पड़ता है।
कर्मचारियों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी कार्य प्रभावित हो सकते हैं और कर्मचारी फील्ड ड्यूटी से बचने लगेंगे।

न्यूज़ देखो: सरकारी कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
चैनपुर की यह घटना केवल एक कर्मचारी पर हमला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा मामला है। यदि सरकारी कर्मी ही खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे, तो ग्रामीण स्तर पर योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों का संचालन प्रभावित होना तय है। प्रशासन ने फिलहाल आश्वासन देकर स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
कानून का सम्मान ही सुरक्षित समाज की पहचान
समाज तभी मजबूत बनता है जब कानून और प्रशासन दोनों का सम्मान किया जाए।
सरकारी कर्मचारी जनता की सेवा के लिए मैदान में उतरते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
विवाद और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं होती।
ग्रामीण समाज को जागरूक होकर कानूनसम्मत तरीके से अपनी बात रखने की आवश्यकता है।
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