#बरवाडीह #डीजल_संकट : डीजल नहीं मिलने से बंदी के कगार पर पहुंचीं आटा चक्कियां।
लातेहार जिले के बरवाडीह बाजार में डीजल संकट के कारण आटा चक्की संचालकों के सामने गंभीर आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। पेट्रोल पंपों द्वारा जार और गैलन में डीजल देने से इनकार किए जाने के बाद कई चक्कियां बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष दीपक राज के नेतृत्व में संचालकों ने प्रशासन को मांगपत्र सौंपकर त्वरित समाधान की मांग की। इस समस्या का असर न केवल व्यवसायियों बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के आम लोगों पर भी पड़ रहा है।
- बरवाडीह बाजार की आधा दर्जन से अधिक आटा चक्कियां डीजल संकट से प्रभावित हुईं।
- व्यावसायिक संघ अध्यक्ष दीपक राज के नेतृत्व में प्रशासन को सौंपा गया मांगपत्र।
- पेट्रोल पंपों द्वारा जार एवं गैलन में डीजल देने से इनकार करने का आरोप।
- ग्रामीण इलाकों में लोगों को गेहूं पिसवाने में हो रही भारी परेशानी।
- प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी ने समाधान का आश्वासन दिया।
लातेहार जिले के बरवाडीह बाजार में डीजल की कमी अब छोटे व्यवसायियों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। खासकर आटा चक्की संचालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी मशीनें पूरी तरह डीजल आधारित हैं। पेट्रोल पंपों द्वारा जार और गैलन में डीजल नहीं दिए जाने के कारण क्षेत्र की कई चक्कियां ठप होने लगी हैं। इससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी समस्या को लेकर गुरुवार को आटा चक्की संचालकों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
व्यावसायिक संघ के नेतृत्व में सौंपा गया मांगपत्र
बरवाडीह बाजार के आटा चक्की संचालकों ने व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष दीपक राज के नेतृत्व में जिले के उपायुक्त एवं जिला आपूर्ति पदाधिकारी, लातेहार के नाम प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी को मांगपत्र सौंपा। मांगपत्र में डीजल उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
संचालकों ने कहा कि वर्तमान समय में पेट्रोल पंप संचालक जार और गैलन में डीजल देने से इनकार कर रहे हैं। इससे आटा चक्कियों का संचालन लगभग ठप पड़ गया है। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर जल्द समाधान निकालने की अपील की।
डीजल पर निर्भर हैं आटा चक्कियां
आटा चक्की संचालकों ने बताया कि उनका पूरा व्यवसाय डीजल पर आधारित है। मशीनों को चलाने के लिए नियमित डीजल आपूर्ति आवश्यक होती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से डीजल नहीं मिलने के कारण मशीनें बंद पड़ी हैं।
व्यवसायियों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। कई परिवारों की आजीविका इन चक्कियों पर निर्भर है और लगातार बंदी की स्थिति से रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी परेशानी
इस समस्या का असर केवल चक्की संचालकों तक सीमित नहीं है। बरवाडीह और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग गेहूं पिसवाने के लिए बाजार पहुंचते हैं। चक्कियां बंद होने के कारण लोगों को दूसरे क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में पहले से ही सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में आटा चक्कियों के बंद होने से आम लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। विशेष रूप से गरीब और दैनिक मजदूरी करने वाले परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
दीपक राज ने प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग
व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष दीपक राज ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यवसायियों का मुद्दा नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा मामला है।
व्यावसायिक संघ अध्यक्ष दीपक राज ने कहा: “छोटे व्यवसायियों की आजीविका बचाने और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए।”
उन्होंने संबंधित पेट्रोल पंपों को निर्देश जारी कर आटा चक्की संचालकों को जार एवं गैलन में डीजल उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
प्रशासन ने दिया समाधान का भरोसा
प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी ने मांगपत्र प्राप्त कर आश्वासन दिया कि इस मामले को जिला स्तर के वरीय अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी ने कहा: “मांगपत्र को जिला प्रशासन तक भेजा जाएगा और नियमों के अनुरूप उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।”
कई व्यवसायी रहे मौजूद
मांगपत्र सौंपने के दौरान कई आटा चक्की संचालक एवं व्यवसायी मौजूद रहे। इनमें पंकज कुमार, विजय अग्रवाल, प्रदीप कुमार, दिलीप मिस्त्री, कुंदन प्रसाद और विनय प्रसाद गुप्ता सहित अन्य लोग शामिल थे।
सभी व्यवसायियों ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द डीजल उपलब्ध नहीं कराया गया तो क्षेत्र की सभी चक्कियां पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर असर पड़ेगा।
न्यूज़ देखो: छोटे व्यवसायियों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई जरूरी
बरवाडीह की यह स्थिति बताती है कि छोटे व्यवसाय आज भी मूलभूत संसाधनों पर कितने निर्भर हैं। डीजल आपूर्ति में आई बाधा ने सीधे तौर पर व्यवसाय, रोजगार और आम जनता की जरूरतों को प्रभावित किया है। प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि छोटे व्यापारियों की समस्याओं को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। यदि समय रहते पहल नहीं हुई तो इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और गहरा पड़ सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
छोटे व्यवसाय बचेंगे तभी गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
गांव और कस्बों की अर्थव्यवस्था छोटे व्यवसायों की बदौलत चलती है।
आटा चक्की जैसे छोटे उद्योग हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार हैं।
जरूरी है कि प्रशासन, समाज और आम लोग मिलकर ऐसे व्यवसायों की समस्याओं को समझें और समाधान के लिए आगे आएं।
स्थानीय संसाधनों और रोजगार को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आपकी क्या राय है?
क्या छोटे व्यवसायियों को डीजल उपलब्ध कराने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, खबर को शेयर करें और स्थानीय मुद्दों को आवाज देने में अपनी भागीदारी निभाएं।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).