सिमडेगा में आंधी-तूफान से बीएसएनएल टावर का सोलर पैनल क्षतिग्रस्त नेटवर्क सेवा प्रभावित होने की आशंका

सिमडेगा में आंधी-तूफान से बीएसएनएल टावर का सोलर पैनल क्षतिग्रस्त नेटवर्क सेवा प्रभावित होने की आशंका

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #आंधी_तूफान : तेज आंधी और बारिश के कारण बीएसएनएल टावर का सोलर पैनल उखड़कर जमीन पर गिरा।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत डोमटोली पंचायत के बाजारटांड़ में सोमवार दोपहर आए तेज आंधी-तूफान से बीएसएनएल टावर का सोलर पैनल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस प्राकृतिक आपदा के कारण क्षेत्र में सरकारी मोबाइल नेटवर्क सेवा ठप होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेकर मरम्मत कार्य की कवायद शुरू कर दी है।

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  • सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत डोमटोली पंचायत के बाजारटांड़ में सोमवार दोपहर करीब 3:00 बजे आया तेज आंधी-तूफान।
  • तेज हवा और जोरदार बारिश के कारण बीएसएनएल (BSNL) टावर पर लगा भारी-भरकम सोलर पैनल उखड़कर जमीन पर गिरा।
  • स्थानीय ग्रामीण संध्या डांग के अनुसार जमीन पर गिरते ही सोलर पैनल पूरी तरह से टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया।
  • अचानक बदले मौसम के मिजाज से क्षेत्र में कई जगहों पर पेड़ और बिजली के तारों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
  • सरकारी संचार व्यवस्था ठप होने की आशंका के बीच स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को घटना की सूचना दी गई।

झारखंड के सिमडेगा जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। सोमवार की दोपहर करीब तीन बजे क्षेत्र में अचानक आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के कारण कोलेबिरा प्रखंड के डोमटोली पंचायत क्षेत्र में स्थित बीएसएनएल टावर का सोलर पैनल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बाजारटांड़ स्थित इस सरकारी संचार टावर के क्षतिग्रस्त होने से पूरे इलाके में मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क सेवा प्रभावित होने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद ग्रामीणों द्वारा तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन और दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद नुकसान के आकलन और बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई है।

अचानक बदले मौसम से मची तबाही और जमीनी हकीकत

सोमवार की दोपहर सिमडेगा के कोलेबिरा प्रखंड और आसपास के इलाकों में सामान्य दिनों की तरह ही चहल-पहल थी। लेकिन दोपहर लगभग 3:00 बजे अचानक आसमान में घने काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज रफ्तार आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई। हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। इसी दौरान डोमटोली पंचायत क्षेत्र के बाजारटांड़ स्थित भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के मोबाइल टावर पर लगा मुख्य सोलर पैनल हवा के दबाव को झेल नहीं सका। तेज हवाओं के झोंके ने पूरे पैनल को स्टैंड सहित उखाड़ फेंका, जिससे वह सीधे जमीन पर आ गिरा।

इस हादसे के दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। तेज आवाज के साथ जब पैनल नीचे गिरा तो उसके परखच्चे उड़ गए। बाजारटांड़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस इकलौते टावर से ही सरकारी दूरसंचार सेवाएं संचालित होती हैं, ऐसे में सोलर पैनल का नष्ट होना पूरे क्षेत्र की संचार व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण ने बयां किया आंधी का खौफनाक मंजर

घटना के समय टावर के समीप ही रहने वाली स्थानीय ग्रामीण महिला ने इस पूरे वाकये को अपनी आंखों से देखा। उन्होंने बताया कि आंधी की रफ्तार इतनी भयावह थी कि टावर हिलने लगा था और कुछ ही सेकंड में सोलर प्लेट्स हवा में उड़ती हुई जमीन पर आ गिरीं।

संध्या डांग ने कहा: “सोमवार दोपहर अचानक मौसम खराब होने के साथ तेज हवा और जोरदार बारिश शुरू हो गई। तेज हवा के कारण बीएसएनएल टावर पर लगा सोलर पैनल अपनी जगह से पूरी तरह उखड़ गया और जमीन पर गिरते ही क्षतिग्रस्त हो गया। हम लोग बहुत डर गए थे क्योंकि हवा का वेग बहुत ज्यादा था।”

पूरे प्रखंड में बिजली और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आंधी-तूफान का असर केवल बीएसएनएल टावर तक ही सीमित नहीं रहा। डोमटोली पंचायत सहित कोलेबिरा प्रखंड के कई अन्य गांवों में भी प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला है। तेज आंधी के कारण कई पुराने और विशाल पेड़ जड़ से उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन भी बाधित रहा।

इसके अलावा, पेड़ों की टहनियां गिरने से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के बिजली के खंभे और तार कई जगहों पर टूट गए हैं। इसके कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली गुल होने और अब बीएसएनएल टावर का सोलर बैकअप सिस्टम नष्ट हो जाने से दोहरी मुसीबत आ खड़ी हुई है। अगर बिजली जल्दी बहाल नहीं हुई और टावर की मरम्मत नहीं की गई, तो पूरा इलाका पूरी तरह से डिजिटल ब्लैकआउट का शिकार हो जाएगा।

प्रशासन को दी गई सूचना, जल्द मरम्मत का भरोसा

घटना के तुरंत बाद डोमटोली पंचायत के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी लिखित और मौखिक सूचना कोलेबिरा प्रखंड प्रशासन तथा बीएसएनएल के स्थानीय तकनीकी अधिकारियों को दे दी है। दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने घटना की गंभीरता को समझते हुए आश्वासन दिया है कि एक विशेष तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर नुकसान का विस्तृत आकलन (Assessment) कराया जा रहा है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, सोलर पैनल पूरी तरह से टूट चुका है, इसलिए उसकी जगह नया पैनल स्थापित करना होगा, जिसमें कुछ दिनों का समय लग सकता है। हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि जब तक नया सोलर पैनल नहीं लग जाता, तब तक वैकल्पिक बिजली व्यवस्था या जेनरेटर के माध्यम से टावर को चालू रखने का प्रयास किया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को नेटवर्क की समस्या से न जूझना पड़े। स्थानीय प्रशासन ने बिजली विभाग को भी जल्द से जल्द गिरे हुए तारों को हटाने और बिजली आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी की कमजोरी और ढांचागत सुरक्षा का सवाल

सिमडेगा की यह घटना यह साफ दर्शाती है कि हमारे ग्रामीण इलाकों में डिजिटल और दूरसंचार का बुनियादी ढांचा कितना संवेदनशील और मौसम पर निर्भर है। बीएसएनएल को देश की जीवनरेखा माना जाता है, विशेषकर झारखंड के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जहां निजी कंपनियां नेटवर्क नहीं पहुंचातीं, वहां लोग पूरी तरह सरकारी नेटवर्क पर आश्रित हैं। ऐसे में एक आंधी से पूरे टावर का पावर बैकअप (सोलर पैनल) नष्ट हो जाना बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन और बीएसएनएल प्रबंधन को केवल आपदा के बाद जागने के बजाय, ऐसे संवेदनशील उपकरणों को आंधी-तूफान रोधी (Storm-resistant) तकनीकों से लैस करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग ग्रामीण और सुरक्षित संसाधन ही हैं हमारे क्षेत्र की असली ताकत

प्राकृतिक आपदाओं पर हमारा नियंत्रण नहीं है, लेकिन अपनी सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और आपदा के समय त्वरित सूझबूझ दिखाना हमारे हाथ में है। सिमडेगा के ग्रामीणों ने सजगता दिखाते हुए तुरंत प्रशासन को सूचित किया, जो एक आदर्श नागरिक कर्तव्य की मिसाल है। हमें अपने क्षेत्र के विकास और सरकारी संसाधनों के रखरखाव के प्रति हमेशा इसी तरह जागरूक और सक्रिय रहना होगा। जब ग्रामीण और प्रशासन मिलकर काम करेंगे, तभी बुनियादी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा।

डिजिटल युग में मोबाइल नेटवर्क का कटना किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है, क्योंकि इससे पढ़ाई, बैंकिंग और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं। इस घटना और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की स्थिति पर आपकी क्या राय है? क्या आपके क्षेत्र में भी बीएसएनएल की सेवाएं मौसम खराब होते ही बाधित हो जाती हैं? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार और अनुभव हमसे जरूर साझा करें। इस महत्वपूर्ण खबर को अपने सिमडेगा और कोलेबिरा के साथियों के साथ शेयर करें ताकि संबंधित विभाग पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बने और नेटवर्क सेवा जल्द बहाल हो सके।

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Written by

सिमडेगा

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