#महुआडांड़ #न्यायिक_कार्रवाई : नेतरहाट स्कूल मामला—व्यवस्था सुधारने के लिए कोर्ट ने दिए कड़े निर्देश।
नेतरहाट स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पुराने आदेश लागू करने को कहा गया। हस्तक्षेप याचिका खारिज कर 25 हजार का जुर्माना लगाया गया। अगली सुनवाई 18 जून को होगी।
- हाईकोर्ट ने नेतरहाट स्कूल मामले में सख्ती दिखाई।
- अधिकारियों को पुराने आदेश लागू करने का निर्देश।
- हस्तक्षेप याचिका पर ₹25,000 का जुर्माना।
- 28 अप्रैल और 2 मई को बैठक करने का आदेश।
- अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित।
लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र स्थित नेतरहाट स्कूल की बदहाल व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि पूर्व में जारी आदेशों को तत्काल लागू किया जाए।
यह मामला लंबे समय से लंबित सुधारात्मक कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें व्यवस्था सुधार को लेकर बार-बार निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि अधिकारियों की नीयत व्यवस्था सुधारने की दिशा में संतोषजनक नहीं दिख रही है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कड़े निर्देश जारी किए।
कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 के आदेश को तत्काल लागू करने और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
बैठक के लिए तय तारीख
कोर्ट ने प्रबंधन समिति को निर्देश दिया कि 28 अप्रैल और 2 मई को हर हाल में बैठक आयोजित की जाए।
यह भी स्पष्ट किया गया कि इन बैठकों की जानकारी और प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करनी होगी।
बीमारी का कारण नहीं माना गया
सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई कि सभापति की बीमारी के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और सख्त रुख बनाए रखा।
इस बीच अशोक सिन्हा के स्थान पर राजकुमार को नया सभापति नियुक्त किया गया है।
हस्तक्षेप याचिका खारिज
मामले में दायर हस्तक्षेप याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस याचिका के माध्यम से कार्यवाही रोकने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
25 हजार का जुर्माना
हस्तक्षेप याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति रोशन बक्शी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि ब्लाइंड बालिका विद्यालय में जमा कराई जाए।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है, जिसमें प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
व्यवस्था सुधार पर जोर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था सुधारने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो आगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
न्यूज़ देखो: अब जवाबदेही तय होगी
नेतरहाट स्कूल का यह मामला दिखाता है कि जब प्रशासनिक लापरवाही बढ़ती है, तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है। अब यह देखना होगा कि आदेशों का पालन कितना गंभीरता से किया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदारी निभाना जरूरी
प्रशासन को जवाबदेह बनाना जरूरी है।
शिक्षा संस्थानों में सुधार प्राथमिकता होनी चाहिए।
लापरवाही पर कार्रवाई जरूरी है।
आइए, हम जवाबदेही की मांग करें।
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