#पिपरवार #बिरसा_पुण्यतिथि : श्रद्धांजलि सभा में समाज ने एकजुट होकर संकल्प दोहराया।
पिपरवार के ओल्ड गेस्ट हाउस में आदिवासी समाज द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर धरती आबा को नमन किया और उनके संघर्ष, बलिदान तथा आदर्शों को याद किया। वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बिरसा मुंडा के योगदान को रेखांकित किया। साथ ही उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया गया।
- पिपरवार ओल्ड गेस्ट हाउस में भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
- आदिवासी समाज के लोगों ने दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
- सुनील मुंडा ने बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
- उपस्थित लोगों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
- कार्यक्रम में समाज के अनेक पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और गणमान्य लोग शामिल हुए।
- सभा के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया।
पिपरवार क्षेत्र में भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। आदिवासी समाज के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर धरती आबा को नमन किया। वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने तथा समाज हित में कार्य करने का संकल्प भी लिया।
दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
पिपरवार के ओल्ड गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुनील मुंडा द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण करके की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने भी बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर महान जननायक को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रहा। लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें सच्चा जननायक बताया।
भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष को किया याद
सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुनील मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के अधिकारों, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।
सुनील मुंडा ने कहा: “भगवान बिरसा मुंडा की शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाएगी। उनके संघर्ष और बलिदान से हमें अपने अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरणा मिलती है।”
उन्होंने कहा कि शहादत दिवस के अवसर पर समाज के लोगों ने यह संकल्प लिया है कि वे भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करेंगे।
वक्ताओं ने सामाजिक एकजुटता पर दिया बल
कार्यक्रम के दौरान कामेश्वर राम, संतोष कुमार दास, बाबुलाल राम, गीता एक्का और ईश्वर पाहन सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने एक स्वर में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन केवल आदिवासी समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी उनके विचार सामाजिक न्याय, अधिकारों की रक्षा और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास से सीख लें और समाज के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन आनंद मुंडा ने किया। इस अवसर पर सिस्टा के पिपरवार क्षेत्रीय अध्यक्ष आनंद मुंडा, सचिव कामेश्वर राम, ब्रह्मदेव उरांव, प्रदीप उरांव, गीता एक्का, देवंती देवी, सुनील मुंडा, अजेश मुंडा, धनंजय मुंडा, जीतू तिर्की, ईश्वर पाहन, भुनेश्वर उरांव, गौरव हेंब्रोम, मनीष बोदरा, भोला मुंडा, राम खेलावन मांझी, मुकेश गंझू, जोनसन विक्की तिर्की, रीना देवी, देवती देवी, बेबी देवी, अपर्णा देवी, जयमणि उरांव, सुमन टोप्पो, गंदूर उरांव, हीरामणि कुमारी, रजनी तिर्की, पुष्पा उरांव, प्रमिला टोप्पो, चेरिया कुमारी, मीरा मिंज समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिसने इसे सामाजिक एकता का प्रतीक बना दिया।
बिरसा मुंडा के आदर्श आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवन में जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने शोषण और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाकर समाज को जागृत किया था। उनके विचार आज भी आदिवासी समाज के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन हमें संघर्ष, आत्मसम्मान और सामूहिक शक्ति का महत्व सिखाता है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज को मजबूत और सशक्त बनाया जा सकता है।
न्यूज़ देखो: श्रद्धांजलि के साथ जागृत हुई सामाजिक चेतना
पिपरवार में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि समाज को अपनी जड़ों और इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास भी था। भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने महापुरुषों के योगदान से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं। अब आवश्यकता है कि उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखकर व्यवहार में भी उतारा जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रेरणा के दीप को पीढ़ी दर पीढ़ी जलाए रखें
महापुरुषों की विरासत केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के व्यवहार और सोच में भी दिखाई देनी चाहिए।
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन हमें संघर्ष, स्वाभिमान और समाज सेवा का संदेश देता है। यदि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को अपनाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
अपने क्षेत्र के ऐसे प्रेरणादायक आयोजनों से जुड़े रहें, जागरूक बनें और अपनी संस्कृति तथा विरासत के संरक्षण में योगदान दें।
अपने विचार कमेंट में साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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