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बसंत नवरात्र के साथ शुरू हुआ आस्था का महापर्व, कलश स्थापना से गूंजे मंदिर और घर

#खलारीधार्मिकआस्था #नवरात्रउत्सव : कलश स्थापना के साथ भक्तों ने शुरू की मां दुर्गा की आराधना।

खलारी क्षेत्र में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से बसंत नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। श्रद्धालु शनिवार को विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में जुट गए। मंदिरों और घरों में भक्ति का माहौल बना हुआ है। आगामी दिनों में चैती छठ और रामनवमी जैसे प्रमुख पर्वों को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं।

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  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से खलारी में शुरू हुआ बसंत नवरात्र पर्व
  • श्रद्धालुओं ने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना की।
  • पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक।
  • 22 मार्च से चैती छठ की शुरुआत, घाटों की सफाई जारी।
  • 27 मार्च को धूमधाम से मनाई जाएगी रामनवमी

खलारी: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शनिवार को बसंत नवरात्र का शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ अपने घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ की। नवरात्र के आगमन के साथ ही वातावरण भक्तिमय हो गया है और हर ओर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रद्धा का माहौल देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में चैती छठ और रामनवमी जैसे प्रमुख पर्वों के कारण धार्मिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

कलश स्थापना के साथ शुरू हुई मां दुर्गा की आराधना

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान पूरे नवरात्र पर्व का आधार माना जाता है। कलश को भगवान गणेश और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जिसके साथ ही मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आरंभ होती है। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर पूरे नौ दिनों तक व्रत और पूजा करते हैं।

मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व

नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और वे शक्ति, स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक हैं। भक्तजन इस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थिरता की कामना करते हैं।

मंदिरों में दिखा विशेष उत्साह और सजावट

खलारी क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। मंदिरों को फूलों, रोशनी और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में उमड़ रही है और पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है।

नौ दिनों तक चलेगा पूजा और व्रत का क्रम

श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करेंगे। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पाठ और हवन का आयोजन किया जाएगा। नवरात्र के अंतिम दिन कन्या पूजन और हवन के साथ इस पर्व का समापन होगा, जिसे विशेष महत्व दिया जाता है।

चैती छठ की तैयारियां भी जोरों पर

नवरात्र के बीच ही चार दिवसीय आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। इस पर्व के लिए व्रतियों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। घाटों की साफ-सफाई की जा रही है और आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

छठ पर्व की तिथियां और अनुष्ठान

24 मार्च को चैत शुक्ल षष्ठी के दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे, जबकि 25 मार्च को सप्तमी के दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन होगा। यह पर्व आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

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रामनवमी को लेकर भी बढ़ा उत्साह

धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में 26 मार्च को महाष्टमी व्रत मनाया जाएगा, जबकि 27 मार्च को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में रामनवमी धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर क्षेत्र में शोभायात्राएं, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा।

प्रशासन ने की सुरक्षा और व्यवस्था की तैयारी

इन सभी प्रमुख पर्वों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां की हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष निगरानी और प्रबंधन किया जा रहा है।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश

बसंत नवरात्र, चैती छठ और रामनवमी जैसे पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता के प्रतीक भी हैं। इन पर्वों के दौरान लोगों के बीच सहयोग, भाईचारा और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से इन आयोजनों का शांतिपूर्ण संचालन क्षेत्र की सकारात्मक पहचान को भी मजबूत करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के इस पर्व में निभाएं जिम्मेदारी और बढ़ाएं सकारात्मकता

नवरात्र और आने वाले सभी पर्व हमें केवल पूजा का अवसर नहीं देते, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का भी संदेश देते हैं। स्वच्छता बनाए रखना, एक-दूसरे की मदद करना और शांति बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।

आप भी अपने आसपास के धार्मिक आयोजनों में सकारात्मक भूमिका निभाएं और दूसरों को प्रेरित करें। त्योहारों की खुशी तभी पूरी होती है जब हर कोई सुरक्षित और खुश रहे।

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Jitendra Giri

खलारी, रांची

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