#खलारी #श्रद्धांजलि_सभा : ग्रामीणों ने सामाजिक योगदान को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र अंतर्गत हेंजदा कुसुम टोला में स्वर्गीय सुरेश उरांव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। सरना प्रार्थना सभा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. सुरेश उरांव ने विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
- हेंजदा कुसुम टोला में स्वर्गीय सुरेश उरांव की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।
- ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर सामाजिक योगदान को याद किया।
- वक्ताओं ने विस्थापितों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को सराहा।
- सरना प्रार्थना सभा के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
- बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपस्थित होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
- समाजहित में किए गए कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
खलारी क्षेत्र के हेंजदा कुसुम टोला में रविवार को भावनात्मक और श्रद्धामय वातावरण के बीच स्वर्गीय सुरेश उरांव की पुण्यतिथि मनाई गई। सरना प्रार्थना सभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने एकत्रित होकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके जीवन तथा सामाजिक योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्व. उरांव के व्यक्तित्व, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें समाज का सच्चा मार्गदर्शक बताया।
ग्रामीणों ने कहा कि स्वर्गीय सुरेश उरांव केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि समाज के अधिकारों और सम्मान की आवाज थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में ग्रामीणों, विशेषकर विस्थापित परिवारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और लोगों को जागरूक करने का कार्य किया।
समाजहित में हमेशा सक्रिय रहे स्व. सुरेश उरांव
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय सुरेश उरांव ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज की सेवा और लोगों को जागरूक करने में समर्पित किया। उन्होंने विस्थापन से प्रभावित लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उनकी समस्याओं को विभिन्न मंचों तक पहुंचाने का कार्य किया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते थे और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनने का प्रयास करते थे। यही कारण है कि उनके निधन के वर्षों बाद भी लोग उन्हें सम्मान और आदर के साथ याद करते हैं।
ग्रामीणों ने साझा की स्मृतियां
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने स्व. सुरेश उरांव से जुड़ी कई यादों को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने समाज को संगठित करने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया था। उनका व्यक्तित्व सरल, मिलनसार और संघर्षशील था।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को किया याद
कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा की गई कि स्व. सुरेश उरांव ने विस्थापित ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर हमेशा आवाज उठाई। उन्होंने लोगों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी उनके द्वारा किए गए कार्य समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और नई पीढ़ी को उनसे सीख लेने की आवश्यकता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
पुण्यतिथि कार्यक्रम में बुधन उरांव, किशोर उरांव, बोले उरांव, अजय उरांव, मिथलेश उरांव, विसुन देवाल, रीत उरांव, रिता उरांव, सीतामनी उरांव, सर्वाजीत उरांव, बालेशर उरांव, उपेंद्र उरांव, हरिता उरांव, सनचरा टाना भगत, भोला उरांव, जुगे उरांव, बाजे उरांव तथा जलेश्वर उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
सभी ने स्वर्गीय सुरेश उरांव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता और जनहित के मुद्दों पर आगे भी कार्य करने का संकल्प लिया गया।
सरना परंपरा और सामाजिक मूल्यों पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरना संस्कृति, सामाजिक एकता और सामुदायिक सहयोग की परंपरा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज के ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृति को जीवित रखना आवश्यक है, जिन्होंने अपने जीवन में जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
ग्रामीणों ने कहा कि स्व. सुरेश उरांव का जीवन समाज सेवा और संघर्ष का उदाहरण है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
न्यूज़ देखो: समाज सेवा की विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत
कुसुम टोला में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज सेवा और जनहित के मूल्यों को याद करने का अवसर भी थी। स्वर्गीय सुरेश उरांव जैसे लोगों का योगदान बताता है कि जागरूक और समर्पित नेतृत्व समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। ऐसे व्यक्तित्वों की विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रेरणा के दीप को जलाए रखें
समाज उन लोगों को कभी नहीं भूलता जो अपने जीवन को जनहित के लिए समर्पित कर देते हैं। स्वर्गीय सुरेश उरांव का जीवन हमें सामाजिक जिम्मेदारी, संघर्ष और सेवा का संदेश देता है।
आइए, हम भी अपने गांव, समाज और क्षेत्र के विकास में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लें। ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों की स्मृतियों को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
आप स्व. सुरेश उरांव के सामाजिक योगदान को किस रूप में देखते हैं? अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज सेवा के इस प्रेरक संदेश को आगे बढ़ाएं।

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