#दिल्ली #आदिवासी_आंदोलन : जंतर मंतर धरना में खरवार भोगता समाज की सक्रिय भागीदारी दर्ज हुई।
आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर 25 फरवरी को दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित राष्ट्रीय धरना प्रदर्शन में देशभर के आदिवासी संगठनों के साथ झारखंड के खरवार भोगता समाज के पदाधिकारी भी शामिल हुए। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय भारत के तत्वावधान में हुआ। इसमें अलग धर्म कॉलम कोड की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। इस आंदोलन को आगामी जनगणना से जोड़कर महत्वपूर्ण बताया गया।
- 25 फरवरी, जंतर मंतर (दिल्ली) में आदिवासी धर्म कोड को लेकर धरना प्रदर्शन आयोजित।
- खलारी-पिपरवार क्षेत्र से खरवार भोगता समाज के पदाधिकारी सक्रिय रूप से शामिल हुए।
- केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा।
- मंच पर देवकुमार धान, प्रेमशाही मुंडा, अभयभट कुंवर सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद।
- अलग आदिवासी धर्म कॉलम को 2026 की जनगणना में पुनर्स्थापित करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई।
दिल्ली में आयोजित इस राष्ट्रीय धरना प्रदर्शन ने एक बार फिर आदिवासी धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। झारखंड के खलारी और पिपरवार क्षेत्र से खरवार भोगता समाज विकास संघ के पदाधिकारियों की भागीदारी ने इस आंदोलन को जमीनी मजबूती प्रदान की। केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। धरना प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों आदिवासी संगठनों ने एक स्वर में अलग धर्म कॉलम की मांग की।
जंतर मंतर पर राष्ट्रीय स्तर का आदिवासी धरना प्रदर्शन
आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर 25 फरवरी को दिल्ली के जंतर मंतर पर राष्ट्रीय स्तर का धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय भारत के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें देश के कई राज्यों से सैकड़ों आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के लिए अलग धार्मिक पहचान सुनिश्चित करना और जनगणना में अलग धर्म कॉलम को पुनर्स्थापित करना था।
धरना स्थल पर विभिन्न आदिवासी संगठनों के नेताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान अलग है, जिसे जनगणना में अलग कॉलम के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।
खलारी-पिपरवार से खरवार भोगता समाज की सक्रिय भागीदारी
इस राष्ट्रीय आंदोलन में झारखंड के खलारी-पिपरवार क्षेत्र से भी खरवार भोगता समाज विकास संघ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा और धरना प्रदर्शन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
दर्शन गंझु ने बताया:
“25 फरवरी को जंतर मंतर में आयोजित धरना प्रदर्शन में देशभर के आदिवासी संगठनों ने मिलकर आदिवासी धर्म कोड की मांग को मजबूती से उठाया और हम भी इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने पहुंचे।”
उनके अनुसार यह केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है।
मंच पर मौजूद रहे राष्ट्रीय स्तर के आदिवासी नेता
धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री देवकुमार धान, प्रेमशाही मुंडा, अभयभट कुंवर सहित कई वरिष्ठ आदिवासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इनके साथ विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों आदिवासी प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अलग धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
झारखंड से खरवार भोगता एवं चेरो समाज के अलावा कई अन्य आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंचे। सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान को संविधानिक और सांख्यिकीय मान्यता मिलनी चाहिए।
1951 की जनगणना से जुड़ी ऐतिहासिक मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1951 और उससे पूर्व की जनगणनाओं में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कॉलम का प्रावधान था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया। अब 2026 की आगामी जनगणना में उस अलग धर्म कॉलम को पुनर्स्थापित करने की मांग जोर पकड़ रही है।
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जब तक आदिवासी धर्म कोड की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस आंदोलन को लंबी रणनीति के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चलाने की तैयारी भी की जा रही है।
प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
धरना प्रदर्शन के उपरांत आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को सम्मान देते हुए जनगणना में अलग धर्म कॉलम को शामिल किया जाए।
इस मौके पर केंद्रीय कोषाध्यक्ष कोलेश्वर गंझु, सदस्य अर्जुन गंझु, रामलखन गंझू, बिगन सिंह भोगता, धनेश्वर गंझु, अजय गंझु (रामगढ़ जिला अध्यक्ष), बालदेव गंझू (हजारीबाग जिला अध्यक्ष), बंधन गंझु, प्रभाकर गंझु, बालेश्वर गंझु सहित कई पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया।
आंदोलन को लेकर समाज की रणनीति और आगे की रूपरेखा
खरवार भोगता समाज विकास संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आदिवासी धर्म कोड की मांग केवल सांकेतिक नहीं बल्कि अस्तित्व और पहचान से जुड़ा विषय है। समाज के नेताओं का मानना है कि अलग धर्म कोड मिलने से आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं को सही पहचान मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर और भी बड़े जनआंदोलन आयोजित किए जाएंगे, ताकि सरकार इस मांग को गंभीरता से ले। समाज ने यह भी संकेत दिया कि आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन लगातार जारी रहेगा।
न्यूज़ देखो: आदिवासी पहचान की राष्ट्रीय लड़ाई और बढ़ती एकजुटता
दिल्ली का यह धरना प्रदर्शन दर्शाता है कि आदिवासी समाज अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर अब पहले से अधिक संगठित हो चुका है। विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों की भागीदारी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्वर दे रही है। सरकार के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि जनगणना में धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील निर्णय की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि इस ज्ञापन और आंदोलन का नीतिगत स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी पहचान और अधिकारों के लिए जागरूक बनें और आवाज मजबूत करें
आदिवासी समाज की एकजुटता यह संदेश देती है कि संगठित प्रयास से ही बड़े बदलाव संभव होते हैं।
सामाजिक अधिकार, सांस्कृतिक सम्मान और पहचान से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना ही मजबूत समाज की पहचान है।
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