तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत, जंगल गई थीं लकड़ी चुनने

तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत, जंगल गई थीं लकड़ी चुनने

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #दर्दनाक_हादसा : लकड़ी चुनने निकली दो बच्चियां तालाब में डूबने से मौत का शिकार हुईं।

गढ़वा जिले के बंशीधर नगर थाना क्षेत्र में दो मासूम बच्चियों की तालाब में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। दोनों बच्चियां मंगलवार को घर से लकड़ी चुनने के लिए निकली थीं, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटीं। बुधवार सुबह गांव के तालाब में दोनों का शव मिलने के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। घटना के बाद पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।

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  • पतहरिया कला गांव की दो बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत।
  • मृतकों में प्रियांशु कुमारी (9 वर्ष) और सुशीला कुमारी (11 वर्ष) शामिल।
  • मंगलवार सुबह घर से लकड़ी चुनने निकली थीं दोनों बच्चियां।
  • बुधवार सुबह कुंबा खुर्द के अकेलवा तालाब में मिला शव।
  • घटना के बाद गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल।
  • पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा।

गढ़वा जिले के बंशीधर नगर थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब कुंबा खुर्द गांव स्थित अकेलवा तालाब में दो मासूम बच्चियों का शव तैरता हुआ मिला। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। दोनों बच्चियां मंगलवार सुबह घर से जंगल की ओर लकड़ी चुनने के लिए निकली थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं। काफी खोजबीन के बावजूद जब उनका पता नहीं चला तो परिजन चिंतित हो उठे। बुधवार सुबह ग्रामीणों की नजर तालाब में तैर रहे शवों पर पड़ी, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

लकड़ी चुनने निकली थीं दोनों बच्चियां

मृत बच्चियों की पहचान राजू राम की 9 वर्षीय पुत्री प्रियांशु कुमारी तथा परमेश्वर राम की 11 वर्षीय पुत्री सुशीला कुमारी के रूप में हुई है। दोनों बच्चियां बंशीधर नगर थाना क्षेत्र के पतहरिया कला गांव की रहने वाली थीं।

परिजनों के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 10 बजे दोनों बच्चियां घर से खाना खाकर जंगल की ओर लकड़ी चुनने के लिए निकली थीं। देर शाम तक घर वापस नहीं लौटने पर परिवार वालों ने आसपास के इलाके में काफी खोजबीन की, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।

सुबह तालाब में मिला शव

बुधवार सुबह गांव के कुछ लोग शौच के लिए कुंबा खुर्द स्थित अकेलवा तालाब की ओर गए थे। इसी दौरान उनकी नजर तालाब में तैर रहे शव पर पड़ी। जब लोगों ने पास जाकर देखा तो गांव में हड़कंप मच गया।

ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना गांव और परिजनों को दी। देखते ही देखते तालाब के पास लोगों की भीड़ जुट गई। बाद में ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चियों के शव को तालाब से बाहर निकाला गया।

घटना के बाद गांव में पसरा मातम

दो मासूम बच्चियों की एक साथ मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव की महिलाएं और बच्चे भी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब के आसपास सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने और बच्चों के अकेले जाने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाबों के आसपास सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्चियां तालाब तक कैसे पहुंचीं। हालांकि प्रारंभिक जांच में मामला डूबने से मौत का माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने कहा: “दोनों बच्चियां बहुत मासूम थीं। एक साथ उनकी मौत से पूरा गांव सदमे में है।”

गांव में पसरा सन्नाटा

घटना के बाद पतहरिया कला गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। बच्चियों के घरों पर लोगों का तांता लगा हुआ है। हर किसी की आंखें नम हैं। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि इस तरह की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को अकेले जंगल और तालाब की ओर नहीं जाने देना चाहिए। साथ ही प्रशासन को भी गांवों में तालाबों के आसपास सुरक्षा बोर्ड और घेराबंदी करनी चाहिए।

न्यूज़ देखो: मासूम जिंदगियों की सुरक्षा अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। गांवों में खुले तालाब, जंगल और असुरक्षित क्षेत्र आज भी मासूमों के लिए खतरा बने हुए हैं। प्रशासन को ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की जरूरत है। वहीं अभिभावकों को भी बच्चों पर विशेष निगरानी रखनी होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज को होना होगा सजग

गांव हो या शहर, बच्चों की सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
छोटी सी लापरवाही कभी-कभी जिंदगी भर का दर्द दे जाती है।
जरूरी है कि बच्चों को अकेले सुनसान या खतरनाक स्थानों पर न जाने दिया जाए।
तालाबों और जलाशयों के आसपास सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं।
अपने गांव और मोहल्ले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाएं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और समाज को जागरूक बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Written by

गढ़वा

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