#सिमडेगा #खरीफ_कृषि : बदलते मौसम के बीच किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कृषि विभाग द्वारा एकदिवसीय प्रखंडस्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। नगर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को बदलते मौसम और संभावित कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई। अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने कम अवधि वाली फसलों की बुवाई, खेत प्रबंधन और कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
- बानो नगर भवन में कृषि विभाग द्वारा एकदिवसीय खरीफ कर्मशाला आयोजित की गई।
- किसानों को कम अवधि वाली फसलों और वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी गई।
- जिप सदस्य बिरजो कंडुलना ने बदलते मौसम को देखते हुए खेती की रणनीति बदलने पर जोर दिया।
- बीडीओ नइमुद्दीन अंसारी ने कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने की अपील की।
- कृषि विशेषज्ञों ने गहरी जुताई और मजबूत मेड़ निर्माण की जानकारी दी।
- कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में खरीफ मौसम की तैयारियों को लेकर कृषि विभाग द्वारा एकदिवसीय प्रखंडस्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। नगर भवन में आयोजित इस कार्यशाला में किसानों को बदलते मौसम, संभावित अल्पवर्षा और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खरीफ फसल के बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक सुझाव उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों को संबोधित करते हुए खेती में नई तकनीकों को अपनाने तथा मौसम के अनुसार फसल चयन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बदलते मौसम के अनुसार खेती करने की सलाह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना ने किसानों से बदलते मौसम और संभावित कम वर्षा को ध्यान में रखते हुए खेती करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर अब खेती पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है, इसलिए किसानों को समय के अनुसार अपनी खेती की पद्धति बदलनी होगी।
जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना ने कहा: “कम वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को कम अवधि वाली फसलों की बुवाई करनी चाहिए ताकि कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।”
उन्होंने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाने और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने की भी अपील की।
कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने पर जोर
प्रखंड विकास पदाधिकारी नइमुद्दीन अंसारी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब खेती केवल परंपरागत जरूरत नहीं बल्कि रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने किसानों से कृषि को व्यवसायिक दृष्टिकोण से अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
बीडीओ नइमुद्दीन अंसारी ने कहा: “यदि किसान आधुनिक पद्धति से खेती करें और योजनाओं का सही उपयोग करें तो कृषि आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का बड़ा माध्यम बन सकती है।”
उन्होंने प्रखंड में संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी भी किसानों को दी।
खेत की गहरी जुताई और मजबूत मेड़ बनाने की सलाह
कार्यक्रम में प्रखंड तकनीकी प्रबंधक कुमार सौरभ ने किसानों को संभावित अल्पवर्षा की स्थिति से निपटने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि खेत की गहरी जुताई करने और मजबूत मेड़ बनाने से वर्षा जल का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे जल संरक्षण आधारित खेती की ओर ध्यान दें ताकि कम बारिश की स्थिति में भी फसल को पर्याप्त नमी मिल सके।
इसके अलावा किसानों को उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और समय पर बुवाई के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
कृषि और पशुपालन दोनों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में केवल खेती ही नहीं बल्कि पशुपालन को भी किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डूडमू बिरुली ने किसानों को पशुपालन से जुड़ी योजनाओं और पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी दी।
कृषि अधिकारियों ने किसानों को बताया कि खेती के साथ पशुपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य गतिविधियों को जोड़कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
बड़ी संख्या में किसान हुए शामिल
कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से किसान भाई-बहन बड़ी संख्या में पहुंचे थे। किसानों ने कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों से अपनी समस्याएं साझा कीं तथा खरीफ फसल को लेकर कई सवाल पूछे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
- जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना
- प्रखंड विकास पदाधिकारी नइमुद्दीन अंसारी
- प्रखंड कृषि पदाधिकारी भरत खंडा पातरा
- पौध संरक्षण पदाधिकारी राजेंद्र बाड़ा
- प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डूडमू बिरुली
- प्रखंड तकनीकी प्रबंधक कुमार सौरभ
- सहायक तकनीकी प्रबंधक राजेश बागे
- हसीबुल अंसारी
- जनसेवक एवं बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन
उपस्थित रहे।
खरीफ सीजन को लेकर बढ़ी तैयारी
कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस प्रकार की कार्यशालाओं का उद्देश्य किसानों को समय रहते सही जानकारी उपलब्ध कराना है ताकि मौसम की चुनौतियों के बावजूद बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में मौसम आधारित खेती और जल संरक्षण तकनीकें किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। ऐसे में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद करेंगे।

न्यूज़ देखो: बदलते मौसम में वैज्ञानिक खेती ही बनेगी किसानों की ताकत
बानो में आयोजित खरीफ कर्मशाला यह दिखाती है कि अब खेती को पुराने तरीके से नहीं बल्कि बदलते मौसम और तकनीक के अनुसार आगे बढ़ाने की जरूरत है। कम वर्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को वैज्ञानिक सलाह देना समय की मांग है। यदि प्रशासन और कृषि विभाग लगातार इसी तरह गांव-गांव तक पहुंच बनाकर किसानों को प्रशिक्षित करें, तो खेती को नुकसान से बचाने के साथ उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
खेती को मजबूत बनाकर ही गांवों की अर्थव्यवस्था होगी सशक्त
किसान मजबूत होंगे तो गांव मजबूत होंगे और गांव मजबूत होंगे तो देश आगे बढ़ेगा। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और जल संरक्षण आधारित खेती आज की सबसे बड़ी जरूरत है। हर किसान तक सही जानकारी पहुंचाना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
अगर आप भी खेती से जुड़े हैं तो नई तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आएं। इस खबर को किसानों तक जरूर पहुंचाएं, अपनी राय कमेंट में लिखें और कृषि जागरूकता की इस मुहिम को मजबूत बनाएं।

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