#सिसई #डिलिस्टिंग_आंदोलन : दिल्ली हुंकार रैली में शामिल होने सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग रवाना हुए।
गुमला जिले के सिसई से शुक्रवार देर शाम बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग दिल्ली में आयोजित डिलिस्टिंग हुंकार रैली में शामिल होने रवाना हुए। आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव के नेतृत्व में निकले इस जत्थे ने जनजातीय आरक्षण और परंपरागत पहचान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलनकारियों ने धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण लाभ लेने पर सवाल उठाते हुए डिलिस्टिंग कानून लागू करने की मांग दोहराई। रैली में देशभर से लाखों लोगों के जुटने का दावा किया गया है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
- सिसई, गुमला से सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग दिल्ली हुंकार रैली के लिए रवाना हुए।
- आंदोलनकारियों ने डिलिस्टिंग कानून लागू करने और जनजातीय आरक्षण की समीक्षा की मांग उठाई।
- आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव ने धर्मांतरण और आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया।
- प्रदर्शनकारियों ने “जो भोलेनाथ का नहीं, वह हमारी जात का नहीं” जैसे नारे लगाए।
- रैली में देशभर से करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया।
- कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की भी जानकारी दी गई।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड से शुक्रवार देर शाम जनजातीय समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष दिल्ली के लिए रवाना हुए। यह जत्था दिल्ली में आयोजित प्रस्तावित हुंकार रैली और धरना-प्रदर्शन में भाग लेने जा रहा है, जहां डिलिस्टिंग कानून लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की जाएगी। आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव के नेतृत्व में निकले लोगों ने पारंपरिक नारों और जनजागरण संदेशों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। इस दौरान पूरे इलाके में आंदोलन को लेकर विशेष उत्साह और राजनीतिक-सामाजिक चर्चा का माहौल देखा गया।
डिलिस्टिंग की मांग को लेकर तेज हुआ आंदोलन
जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य धर्मांतरण के बाद भी अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ लेने की व्यवस्था की समीक्षा करना बताया जा रहा है। आंदोलनकारी यह मांग कर रहे हैं कि जो लोग अपनी पारंपरिक जनजातीय धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर किया जाए।
आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज को उनकी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा, पूजा-पद्धति और सामाजिक व्यवस्था के आधार पर संवैधानिक अधिकार और आरक्षण मिला है। लेकिन कुछ लोग धर्मांतरण के बाद भी उसी आरक्षण व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जिससे मूल जनजातीय समाज प्रभावित हो रहा है।
सुमेश्वर उरांव ने कहा: “जनजातीय समाज को उसकी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर आरक्षण मिला है। अगर कोई समाज से अलग रास्ता अपनाता है, तो उसे उसी आधार पर अलग व्यवस्था में जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि इसी विसंगति को दूर करने के लिए पूरे देश में डिलिस्टिंग कानून लागू करने की मांग की जा रही है।
नारों और जनजागरण के साथ दिल्ली रवाना हुए लोग
दिल्ली रवाना होने से पहले आंदोलन में शामिल लोगों ने पारंपरिक नारों के साथ अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। “जो भोलेनाथ का नहीं, वह हमारी जात का नहीं” जैसे नारों के माध्यम से आंदोलनकारियों ने अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता से रखा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जनजातीय समाज अपनी मूल परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से दूर होता जा रहा है, जिससे सामाजिक एकता कमजोर हो रही है। ऐसे में डिलिस्टिंग कानून लागू होने से जनजातीय समाज को वास्तविक लाभ मिलेगा और आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य भी मजबूत होगा।
सुमेश्वर उरांव ने कहा: “अब जनजातीय समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है। गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।”
देशभर से लाखों लोगों के जुटने का दावा
आयोजकों ने दावा किया कि दिल्ली में होने वाली इस हुंकार रैली में देशभर से लगभग 10 लाख लोग शामिल होंगे। आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक डिलिस्टिंग कानून लागू नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन सड़क से संसद तक जारी रहेगा।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का आंदोलन है। आंदोलनकारियों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक विमर्श का बड़ा विषय बन सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष रखी जाएगी मांग
कार्यक्रम को लेकर यह भी जानकारी दी गई कि दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनके समक्ष जनजातीय समाज की मांगों को रखा जाएगा और डिलिस्टिंग कानून लागू करने की दिशा में ठोस पहल की मांग की जाएगी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
बड़ी संख्या में महिला-पुरुष हुए शामिल
दिल्ली रवाना होने वाले जत्थे में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनजातीय समाज के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुमित महली, विश्व भूषण खड़िया, राजेश उरांव, भैरव सिंह खेरवार, जयराम उरांव, इंद्रपाल भगत, रिचर्डसन एक्का, करिंदर पहान, सुमन कुमारी, सरोज कुमारी, अशोक कुमार भगत, बालेश्वर भगत, बालेश्वर उरांव, कर्मपाल उरांव, सुरेंद्र उरांव, मनोज उरांव, चंद्रदेव उरांव, मनदीप महली, कृष्णा महली, भीखा लोहरा, लोहरा खड़िया, अजय सिंह खेरवार, घनश्याम बड़ाईक, संदीप महली, सुकरु खड़िया, सुरेश नगेसिया, छोटेलाल सिंह खेरवार, प्रेमी देवी, चारोमति देवी, गेदी देवी, तारकेश्वर उरांव, लालू उरांव, संदीप सिंह खेरवार, सुधीर उरांव, राजेंद्र गोप, कालेश्वर गोप, बालेश्वर बड़ाईक, मुकेश बड़ाईक, रविंद्र महली, पंचू उरांव एवं चारवा उरांव सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो: जनजातीय पहचान और आरक्षण पर फिर तेज हुई बहस
सिसई से दिल्ली के लिए निकला यह आंदोलन केवल एक रैली नहीं, बल्कि जनजातीय पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी बड़ी बहस का संकेत है। डिलिस्टिंग की मांग लंबे समय से विभिन्न मंचों पर उठती रही है, लेकिन अब यह आंदोलन ग्रामीण स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। सरकार और नीति निर्धारकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे सामाजिक संवेदनशीलता और संवैधानिक संतुलन के साथ इस विषय पर विचार करें। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक विमर्श दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से रखना हर नागरिक का अधिकार है। समाज से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता और संवाद ही सकारात्मक बदलाव का रास्ता तैयार करते हैं। जनजातीय समाज की परंपरा, संस्कृति और अधिकारों को लेकर उठ रही आवाजें आने वाले समय में व्यापक सामाजिक चर्चा का आधार बन सकती हैं।
यदि आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं, तो उसे खुलकर सामने रखें। खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें ताकि समाज और नीति से जुड़े विषयों पर स्वस्थ चर्चा आगे बढ़ सके। अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर दें और न्यूज़ देखो के साथ जुड़े रहें।

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