#विश्रामपुर #दीवार_हादसा : पहाड़ गेरुआ गांव की दर्दनाक घटना पर प्रशासन से सहायता की मांग।
पलामू जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पहाड़ गेरुआ गांव में दीवार गिरने से हुई दो लोगों की मौत के बाद भाजपा नेता एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता किशोर कुमार पांडेय ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने प्रशासन से मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक और मातम का माहौल बना हुआ है।
- पहाड़ गेरुआ गांव में दीवार गिरने से दो लोगों की हुई थी मौत।
- भाजपा नेता किशोर कुमार पांडेय ने घटना पर जताया गहरा दुख।
- मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग।
- निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन पर दिया जोर।
- प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग से जांच कराने की अपील।
- हादसे के बाद पूरे गांव में पसरा शोक का माहौल।
पलामू जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र स्थित पहाड़ गेरुआ गांव में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। शुक्रवार को मकान निर्माण कार्य के दौरान पुरानी जर्जर दीवार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। हादसे के बाद मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता किशोर कुमार पांडेय ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि एक ही हादसे में दो लोगों की जान जाना अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
हादसे में दो लोगों की हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को पहाड़ गेरुआ गांव में मकान निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक पुरानी और जर्जर दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे की चपेट में आने से मजदूर दुखी भुइयां और 18 वर्षीय सतीश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
स्थानीय लोगों ने दोनों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों ने बताया कि दीवार काफी पुरानी और कमजोर थी। निर्माण कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ।
किशोर पाण्डेय ने जताई संवेदना
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता किशोर कुमार पांडेय ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोगों की इस तरह मौत होना बेहद पीड़ादायक है। इस हादसे ने दोनों परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है।
किशोर कुमार पांडेय ने कहा: “एक ही हादसे में दो लोगों की मौत होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन को आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों की हरसंभव सहायता करनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में सरकारी सहायता और प्रशासनिक सहयोग पीड़ित परिवारों को मानसिक और आर्थिक सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रशासन से मुआवजा देने की मांग
किशोर पांडेय ने जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हादसे की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
साथ ही उन्होंने मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
किशोर कुमार पांडेय ने कहा: “मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे इस कठिन परिस्थिति से उबर सकें।”
उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों और निर्माण कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों को गंभीरता से काम करना होगा।
सुरक्षा मानकों के पालन पर दिया जोर
घटना के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। किशोर पांडेय ने कहा कि कई बार निर्माण कार्यों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसके कारण इस प्रकार की दुर्घटनाएं होती हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
किशोर कुमार पांडेय ने कहा: “भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है।”
स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि जर्जर भवनों और दीवारों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
गांव में पसरा मातम
हादसे के बाद पहाड़ गेरुआ गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग लगातार पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए यह हादसा किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।
न्यूज़ देखो: मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता जरूरी
विश्रामपुर की यह घटना निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। मजदूरों की सुरक्षा केवल कागजी नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर उसका पालन सुनिश्चित होना आवश्यक है। प्रशासन को पीड़ित परिवारों की मदद के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित निर्माण और मानवीय संवेदना दोनों जरूरी
हर निर्माण कार्य में सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
मजदूरों की जिंदगी किसी भी निर्माण से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े रहें।
ऐसी घटनाओं से सीख लेकर सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करना समय की मांग है।
आप भी अपने आसपास निर्माण कार्यों में सुरक्षा को लेकर जागरूक रहें। खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट में दें और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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