#कोलेबिरा #आदिवासी_सम्मेलन : मुण्डा समुदाय ने जल, जंगल, जमीन और संस्कृति संरक्षण पर जताई एकजुटता।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत डोमटोली में लेले बुरु परगणा और बीरु परगणा के मुण्डा समुदायों का विशाल सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में सामाजिक एकता, आदिवासी संस्कृति, पेसा कानून और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने समुदाय को एकजुट रहने और आदिवासी मूल्यों को संरक्षित रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में विभिन्न पड़हा राजा, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए।
- डोमटोली में मुण्डा समुदायों का विशाल सम्मेलन आयोजित।
- विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल।
- सामाजिक एकता और आदिवासी पहचान बचाने पर दिया गया जोर।
- पेसा कानून और स्वशासन के अधिकारों पर हुई विस्तृत चर्चा।
- जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को बताया गया समुदाय की ताकत।
- सम्मेलन में करीब 70-80 पड़हा राजाओं ने भाग लिया।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत डोमटोली गांव में लेले बुरु परगणा और बीरु परगणा के मुण्डा समुदायों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 22 पड़हा राजा, हातु मुण्डा, महतो, पाहन, पुजार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में मुण्डा समुदाय के लोग शामिल हुए।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों को मजबूत करना था। कार्यक्रम में विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने समुदाय के लोगों को सामाजिक एकजुटता बनाए रखने का संदेश दिया।
सामाजिक एकता को बताया सबसे बड़ी ताकत
अपने संबोधन में विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामाजिक एकता और सामुदायिक भावना है।
उन्होंने कहा कि पुरखों की परंपरा, संघर्ष और सामूहिकता की वजह से ही आज समुदाय अपनी पहचान बनाए रखने में सफल रहा है।
विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने कहा: “अपनी सामाजिक एकता को हर हाल में बनाए रखें। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसी के बल पर हमारे पुरखे हमें इस मुकाम तक लेकर आए हैं।”
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाजों को बचाने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा पर जोर
सम्मेलन में विधायक ने आदिवासी समाज की पहचान को जल, जंगल और जमीन से जुड़ा बताया।
उन्होंने कहा कि समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करनी चाहिए और उनका समुचित उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा: “हमारी अस्तित्व और पहचान हमारी भाषा, संस्कृति और आजीविका से जुड़े संसाधनों से है। जल, जंगल और जमीन को हर हाल में बचाना होगा।”
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी समाज की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
पेसा कानून और स्वशासन पर हुई चर्चा
सम्मेलन में पेसा कानून और आदिवासी स्वशासन के अधिकारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
विधायक ने कहा कि आदिवासी हितैषी सरकार ने पेसा कानून की नियमावली बनाकर लागू कर दी है, जिसका लाभ समुदाय को उठाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से पेसा कानून को पढ़ने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की अपील की।
विधायक ने कहा: “स्वशासन के अधिकारों का पूरा लाभ उठाकर अपने समुदाय को और मजबूत बनाएं।”
उन्होंने कहा कि समुदाय को अपने पारंपरिक मूल्यों और आदिवासी व्यवस्था के आधार पर जीवन जीने की आवश्यकता है।
बेटियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
अपने संबोधन में विधायक ने समाज की बेटियों और महिलाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने कहा: “अपने नस्ल को शुद्ध और पवित्र बनाए रखें। इसमें समाज की बेटी-बहनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।”
उन्होंने परिवार और समाज को बेटियों की परवरिश जिम्मेदारी और सम्मान के साथ करने का संदेश दिया।
कई वक्ताओं ने रखे विचार
सम्मेलन में कई वक्ताओं ने सामाजिक एकता, आदिवासी अधिकार, भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में सुधीर कन्डुलना, सिप्रियन समद, बिलकन डांग, सोसन समद, रोयल डांग, सिप्रियन जड़िया, शान्तियल बागे और उम्बलन डांग ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी।
सम्मेलन का संचालन जुनास डांग ने किया, जबकि सभा सचिव की भूमिका बिजय कन्डुलना ने निभाई। धन्यवाद ज्ञापन सुबास डांग द्वारा किया गया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समुदाय के लोग
सम्मेलन में करीब 70-80 पड़हा राजाओं सहित बड़ी संख्या में मुण्डा समुदाय के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में बिश्राम बागे, लूथर सुरीन, सामुवेल डांग, सुशील कन्डुलना, सिप्रियन कन्डुलना, सुगड कन्डुलना, मुकूट बागे, अर्जुन हीरो, राफेल कन्डुलना, डोमटोली मुखिया अनिता लुगून जडिया, सुगड जडिया, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी, अमृत डुंग डुंग, कुलदीप सोरेंग और अशोक लुगून सहित कई लोग मौजूद रहे।
सम्मेलन में समुदाय के लोगों ने सामाजिक एकजुटता बनाए रखने और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: सामाजिक एकता और संस्कृति संरक्षण से ही मजबूत होगा समाज
कोलेबिरा में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा आज भी आदिवासी समाज के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करने का अवसर मिलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी
समाज की ताकत उसकी एकता और संस्कृति में छिपी होती है।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
प्रकृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की रक्षा मिलकर ही संभव है।
जागरूक समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
अगर आप भी अपनी संस्कृति और समाज से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण मानते हैं, तो इस खबर को ज्यादा से ज्यादा साझा करें। अपनी राय कमेंट में दें और समाज की एकता और जागरूकता को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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